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Syed


पुरुषों से मिलने से ही महिलाओं का चेहरा चमक उठता है: शो

महिलाओं के चेहरे
पुरुषों की संगत में महिलाओं के चेहरे का तापमान अपने आप बढ़ सकता है
एक नए अध्ययन में सामने आया है कि किसी पुरुष से मात्र बातचीत करने से ही महिलाओं के चेहरे पर चमक आ जाती है.
सेंट एंड्रियूज विश्वविद्यालय में शोधकर्ताओं ने पाया है कि पुरुषों से बिना यौन संबंध बनाए भी महिलाओं के चेहरे का तापमान बढ़ने लगता है जो साफ दिखाई देता है.
इस टीम ने महिलाओं में हो रहे बदलावों को पता लगाने के लिए उनकी पुरुषों से मुलाकात के दौरान 'थर्मल इमेजिंग' की मदद ली.
उन्होंने पाया कि पुरुषों की संगत में महिलाओं के चेहरे का तापमान अपने आप बढ़ सकता है.
शोध करने वाली टीम का कहना है कि इन परिणामों को थर्मल इमेजिंग के विकास में इस्तेमाल किया जा सकता है जिससे भविष्य में तनाव इत्यादी पर नजर रखी जा सकती है, जैसे कि झूठ पकड़ने वाले यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट में.

कैसे किया शोध

अध्ययन की मुख्य लेखक अमांदा हाहन

"उत्तेजना में किसी प्रयोगात्मक बदलाव के बिना ही, यह बदलाव साधारण सामाजिक मुलाकातों में देखा जाता है. हमारे सहभागियों ने मुलाकात के दौरान किसी शर्मिंदगी या असुविधा का अहसास नहीं किया."
इस अध्ययन की मुख्य लेखक अमांदा हाहन ने कहा कि शोधकर्ताओं ने पुरुषों से महिलाओं की मुलाकात के दौरान उनके हाथ, बाजू, छाती और चेहरे की त्वचा के तापमान को नापा.
उन्होंने कहा, ''उत्तेजना में बिना किसी प्रयोगात्मक बदलाव के ही, यह बदलाव साधारण सामाजिक मुलाकात में देखा गया. हमारे सहभागियों ने मुलाकात के दौरान किसी शर्मिंदगी या असुविधा का अहसास नहीं किया.''
इस महीने 'बायेलॉजी लेटर्स' में छपने वाले इस अध्ययन में दिखाया गया है कि यह प्रतिक्रिया केवल महिलाओं में ही पाई जाती है. लेकिन दूसरी महिलाओं से मुलाकात के दौरान किसी महिला के चेहरे के तापमान में कोई बदलाव नहीं देखा जाता.
शोध करने वाली टीम का अगला लक्ष्य यह देखना होगा कि क्या इन शारीरिक बदलावों का सामाजिक मुलाकातों पर असर होता है.

Syed Shahanawaj alam

Child Save


समय से पहले पैदा हुए बच्चों को बुढ़ापे में दिक्कतें

असमय पैदा हुए बच्चों में बाद के दिनों में मानसिक बीमारी हो सकती है
अगर बच्चे का जन्म नौ महीने पूरा होने से पहले हुआ है तो हो सकता है कि बुढ़ापे में उन्हें किसी प्रकार की मानसिक बीमारी का सामना करना पड़े.
‘द आर्काइव्स ऑफ जनरल साईकाईट्री’ के अध्ययन से पता चला है कि असमय पैदा हुए बच्चों को द्विध्रुवी विकार, मानसिक अवसाद और मनोविकार की बीमारी हो सकती है.
हालांकि शोध में कहा गया है कि ये खतरा बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन तुलनात्मक रूप से असमय पैदा हुए बच्चों में ये बीमारियां ज्यादा होती हैं.
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर असमय पैदा हुए बच्चों के उपर अब कुछ ज्यादा ही ध्यान दिया जाता है.
वैसे तो बच्चे को गर्भ में रहने का समय चालीस सप्ताह है, लेकिन 13 बच्चों में से हर एक बच्चा 36 सप्ताह से पहले असमय पैदा होता है.

आंकड़ों का अध्ययन

"जिन लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया गया है, वे चालीस साल पहले पैदा हुए थे. उस समय के चाइल्ड केयर सेंटर और आज के चाइल्ड केयर सेंटर में जमीन आसमान का अंतर है. "
एंडी कोल, एसएएनई के प्रमुख कार्यकारी
लंदन के किंग्स कॉलेज के इंस्टीट्यूट ऑफ साईकाईट्री और स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने स्वीडन में वर्ष 1973 से 1985 के बीच पैदा हुए 13 लाख लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया है.
अध्ययन से पता चला है कि इसमें से 10 हजार 523 लोग मानसिक बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती हुए थे जिनमें 580 लोग असमय पैदा हुए थे.
शोधकर्ताओं का कहना है कि जो बच्चे असमय पैदा नहीं हुए थे, उनमें से एक हजार में सिर्फ दो व्यक्तियों को हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा था. जबकि जो बच्चे 36 हफ्ते से पहले पैदा हुए थे उनमें से प्रति एक हजार व्यक्तियों में से चार को मानसिक बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था.
32 हफ्ताह से पहले पैदा हुए बच्चों में यह संख्या छह थी.
जो बच्चे इससे भी ज्यादा पहले पैदा हुए थे, उनमें द्विध्रुवी विकार का खतरा सात गुणा अधिक पाया गया और उनमें डिप्रेशन का खतरा तीन गुणा ज्यादा था.
शोधकर्ताओं में से एक शोधकर्ता डॉक्टर चियारा नोसारटी का कहना था कि यह संख्या अधिक भी हो सकती है क्योंकि अगर कम परेशानी होती है तो बहुत से लोग हॉस्पिटल नहीं आते है.

'चिंता की बात नहीं'

असमय पैदा होने वाले बच्चों को खतरा तो है लेकिन विशेषज्ञ के अनुसार ये अधिक चिंता की बात नहीं.
हालांकि उनका कहना था कि इसमें बहुत ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि अधिकतर असमय पैदा हुए बच्चे बिल्कुल ठीक रहते हैं.
डॉक्टर चियारा नोसारटी ने बीबीसी को बताया, “मुझे ये कतई नहीं लगता है कि मां-बाप को इससे चिंतित होने की जरुरत है. चूंकि हम जानते हैं कि असमय पैदा हुए बच्चों में कुछ बीमारी हो जाने की आशंका बनी रहती है, इसलिए वैसे बच्चों के मां-बाप को इसका ख्याल रखना चाहिए कि ज्योंहि उनमें इसके कोई लक्षण दिखाई पड़े, तुरंत इसका इलाज करवाएं जिससे कि आगे चलकर यह कोई बड़ा रूप न ले ले.”
मेंटल हेल्थ चैरिटी एसएएनई के मारजोरी वैलेस का कहना है, “हम पहले से ही जानते थे कि असमय पैदा होने बच्चे सिजोफ्रेनिया का शिकार हो सकते हैं, लेकिन चौंकानेवाला तथ्य यह है कि उन बच्चों को मानसिक बीमारी भी हो सकती है जिसमें उन्हें अस्पताल में दाखिल कराना पड़ सकता है.”
बेबी केयर के चैरिटी ब्लिस का कहना था कि यह तो पहले से ही पता था कि असमय पैदा हुए बच्चों के दिमाग के विकास पर असर रहता है.
जबकि प्रमुख कार्यकारी एंडी कोल ने आगाह करते हुए कहा है, “जिन लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया गया है, वे चालीस साल पहले पैदा हुए थे. उस समय का चाइल्ड केयर सेंटर और आज के चाइल्ड केयर सेंटर में जमीन आसमान का अंतर है.”
अब ब्रेन को ठंढ़ा रखने की व्यवस्था कर ली गई है जिससे कि किसी प्रकार का खतरा न हो, साथ ही इसकी भी पुख्ता इंतजाम किया गया है जिससे कि दिमाग में प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन जाए.क्लिक करेंलें

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